Author Archives: dilipbhagat

कबीर महोत्सव में मंत्री श्री शर्मा

भोपाल। जनसम्पर्क एवं आध्यात्म मंत्री पी.सी. शर्मा सतगुरु कबीर महोत्सव में सम्मिलित हुए। श्री शर्मा ने मानव समाज के नव-निर्माण में संत कबीर के योगदान की जानकारी देते हुए श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। महोत्सव का आयोजन रविन्द्र भवन में समग्र अनुसूचित जाति जनजाति संघ द्वारा संस्कृतिक विभाग के सहयोग से किया गया। मंत्री श्री शर्मा ने महोत्सव में आए संतों का स्वागत किया।

आज के दौर में सामाजिक परिवेश तेजी से बदल रहा है

आज के दौर में सामाजिक परिवेश तेजी से बदल रहा है। हालत यह है कि तकनीक से दिग्भ्र्मित वर्तमान पीढ़ी को हमारे पुरातन सांस्कृतिक वैभव का कोई ज्ञान नहीं है। इसका सीधा असर एक घर और परिवार से लेकर पूरे समाज और राष्ट्र पर पड़ रहा है। वर्तमान दौर में इस पीढ़ी को तकनीक से दूर रखना भी इतना सहज नहीं है। ऐसे में मीडिया ब्रिज समूह समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए धर्म, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों पर केंद्रित डिजीटल चैनल आस्था न्यूज़ की शुरुआत की गई है। इस चैनल में हमारे सामाजिक परिवेश के साथ धर्म और संस्कृति की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। -निर्मल सिरोहिया

व्रत, त्यौहार, तिथि

वर्ष 2020 के मार्च माह की 25 तारीख यानि बुधवार को चैत्र शुक्ल पक्षप्रारंभ। इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 26 मिनिट और सूर्यास्त शाम 06 बजकर 40 मिनिट पर होगा। यह दिन शक संवत 1942 एवं विक्रम संवत 2077 के तहत गणना किया जा रहा है। यह दिन चैत्र – अमान्त एवं पुरमान्त माह का फाल्गुन कहलाता है। इस दिन का नक्षत्र रेवती और योग ब्रह्म है। इस दिन का करण बव द्वितीय करण बालव है। इस दिन सूर्य में मीन राशि और चन्द्र में मीन राशि रहेगी। इस दिन प्रातः 12 बजकर 33 मिनिट से दोपहर 14 बजकर 04 मिनिट तक राहुकाल रहेगा।

भारत को विश्वगुरू बनाना है-भागवत

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि RSS का विस्तार देश के लिए है, क्योंकि हमारा लक्ष्य भारत को विश्वगुरू बनाना है। मोहन भागवत ने कहा कि ‘संघ को बड़ा करना है, क्योंकि अपने देश को बड़ा करना है। विश्वगुरू देश बनाना है, क्योंकि इसकी आवश्यकता है। भारत को अपने लिए बड़ा नहीं बनना है।’
राष्ट्रवाद पर बोलते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि ‘राष्ट्रवाद का दुनिया में अच्छा अर्थ नहीं है। कुछ वर्ष पूर्व ब्रिटेन जाना हुआ। वहां कुछ बुद्धिजीवियों से मुलाकात होनी थी। उससे पहले 40-50 कार्यकर्ताओं से संघ के बारे में चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यहां बातचीत में शब्दों के अर्थ भिन्न हो जाते हैं, इसलिए आप राष्ट्रवाद शब्द का इस्तेमाल नहीं कीजिएगा, क्योंकि यहां राष्ट्रवाद का मतलब होता है हिटलर, नाजीवाद, फासीवाद। अब ऐसे ही यह शब्द बदनाम हुआ है। ‘भागवत ने कहा कि ‘आज की दुनिया को भारत की आवश्यकता है। कट्टरपंथी, पर्यावरण जैसी जो अनेक समस्याएं खड़ी होती हैं, जिसे लेकर दुनिया में अशांति है, इसे मानव ने खुद इजाद किया है।इसे लेकर राहत देने वाला कोई नहीं है। युद्धिष्ठिर के समय से भारत का स्वभाव दुनिया की कमी को पूरा करनेवाला रहा है। दुनिया को तो जोड़नेवाला तत्व पता ही नहीं है।’
पूर्व राष्ट्रपति प्रमब मुखर्जी से मुलाकात को याद करते हुए भागवत ने कहा कि ‘जब प्रणब दा राष्ट्रपति थे तो उनसे मिलने गया था। उन्होंने कहा कि हमारा देश ऐसा है जो विविधता को स्वीकार करता है। ये बात हमारे संविधान में है। ये इसलिए ऐसा नहीं हुआ कि हमारे संविधान निर्माता ऐसे थे, ऐसी हमारी परंपरा रही है। ये विविधता एक से ही निकली है। ‘भागवत ने जोर देते हुए कहा कि ‘हमें किसी से डर कर एक नहीं होना है। हम एक हैं इसलिए सबको एकसाथ आना है। हम अपने लिए नहीं जीते, एक दूसरे के लिए जीते । जो त्याग से जीएगा वो ही महान है।'(साभार)