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Vastu Tips: चुटकी भर नमक से दूर होगी घर की वास्तु संबंधी कई दिक्कतें, ऐसे करें यूज

नमक के बिना हम अपने खाने के स्वाद की कल्पना भी नहीं कर सकते. है ना! बिना नमक (Salt) का खाना कितना बेस्वाद होता है, ये तो आपने भी कभी न कभी जरूर महसूस किया होगा. हमारे किचन की सबसे अहम सामग्रियों में से एक नमक की वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में भी अहम भूमिका है. ज्योतिष शास्त्र और वास्तु एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चुटकी भर नमक घर की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को दूर कर घर में पॉजिटिव माहौल बनाता है, जिससे सुख-समृद्धि आती है, मानसिक शांति बनी रहती है, पैसों की दिक्कत दूर होती है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी माहौल बेहतर रहता है. वास्तु शास्त्र में नमक का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है यहां जानें.

वास्तु शास्त्र में नमक का महत्व

1. घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का माहौल बना रहे, नकारात्मकता दूर हो और परिवार के सदस्यों के बीच क्लेश और झगड़े ना हों, इससे बचने के लिए घर में जब भी पोंछा लगाएं तो उस पानी में चुटकी भर नमक डाल दें. नमक वाले पानी से घर में पोंछा लगाने से पॉजिटिव एनर्जी आती है जिससे परिवार के सदस्यों के बीच रिश्ते बेहतर होते हैं.

2. आप अपने घर में किचन में नमक को किस बर्तन में रखते हैं इसका भी वास्तु पर काफी प्रभाव पड़ता है. लिहाजा नमक को कभी भी स्टील या लोहे के बर्तन में नहीं रखना चाहिए. नमक को हमेशा कांच के बर्तन (Glass Jar) या जार में ही रखें. ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक दिक्कतें भी नहीं आती. आप चाहें तो नमक के जार में 1 लौंग भी डाल सकते हैं.

3. कई बार राहु (Rahu) के नकारात्मक प्रभाव के कारण भी घर में निगेटिव ऊर्जा का संचार होने लगता है जिसकी वजह से परिवार के सदस्य बीमार रहने लगते हैं. इससे निपटने के लिए कांच की कटोरी में सेंधा नमक की डलियां भरकर बाथरूम में रखना चाहिए. हर 15 दिन में 1 बार इस नमक को बदलते रहें. ऐसा करने से राहु के निगेटिव असर को दूर करने में मदद मिलती है. 

4. अगर आपको मानसिक शांति नहीं मिल रही, किसी वजह से तनाव और स्ट्रेस (Stress) बहुत अधिक हो गया है, काम में मन नहीं लग रहा तो इसमें भी आपकी मदद कर सकता है नमक. इसके लिए अपने नहाने के पानी में चुटकी भर नमक मिलाएं और उससे नहाएं. आप चाहें तो रात में सोने से पहले नमक वाले पानी से हाथ-पैर धो सकते हैं. ऐसा करने से तनाव दूर होता है और अच्छी नींद आती है.

|हनुमान जी से जानिए सफलता के सूत्र

हनुमान जी की पूजा से ही नहीं बल्कि उनसे कुछ बातें सीख लेने पर भी हमारी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं और सभी कामों में सफलता मिल सकती है। यहां जानिए हनुमान जी से हम कौन-कौन सी बातें सीख सकते हैं

1. संघर्ष क्षमता

हनुमान जी जब सीता जी की खोज में समुद्र पार कर रहे थे, तब उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। सुरसा और सिंहिका नाम की राक्षसियों ने हनुमान जी को समुद्र पार करने से रोकना चाहा था, लेकिन बजरंग बली नहीं रुके और लंका पहुंच गए। हमें भी कदम-कदम पर ऐसे ही संघर्षों का सामना करना पड़ता है। संघर्षों से न डरते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढऩे की सीख हमें हनुमान जी से लेनी चाहिए।

2. चतुराई

हनुमान जी ने समुद्र पार करते समय सुरसा से लडऩे में समय नहीं गंवाया। सुरसा हनुमान जी को खाना चाहती थी। उस समय हनुमान जी ने अपनी चतुराई से पहले अपने शरीर का आकार बढ़ाया और अचानक छोटा रूप कर लिया। छोटा रूप करने के बाद हनुमान जी सुरसा के मुंह में प्रवेश करके वापस बाहर आ गए। हनुमान जी की इस चतुराई से सुरसा प्रसन्न हो गई और रास्ता छोड़ दिया। चतुराई की यह कला हम हनुमान जी से सीख सकते हैं।

3. संयमित जीवन

हनुमान जी आजीवन ब्रह्मचारी रहे यानी उनका जीवन संयमित था। संयमपूर्वक रहने के कारण ही वह बहुत ताकतवर थे। हमारे जीवन में खान-पान और रहन-सहन सब कुछ असंयमित हो रहा है। असंयमित दिनचर्या के कारण गंभीर रोगों का डर लगा रहता है। संयम के साथ कैसे रहना चाहिए, यह बात हम हनुमान जी से सीख सकते हैं। जो लोग अपने खान-पान और रहन-सहन में सावधानी रखेंगे तो उन्हें श्रेष्ठ स्वास्थ्य मिल सकता है।

4. लोक कल्याण

हनुमान जी का अवतार ही श्री राम के काम के लिए हुआ था। श्री राम का काम यानी रावण का अंत करके तीनों लोकों को सुखी करना। हनुमान जी ने श्री राम का साथ दिया। हमें भी हनुमान जी से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि जो लोग अच्छा और समाज सेवा का काम करते रहें, उनका साथ दें।


|बुद्धि के देवता गणेश

भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और बुद्धि का देवता माना जाता है और बुधवार को उनकी आराधना विशेष लाभकारी मानी जाती है। श्रीगणेश की पूजा सभी देवताओं से पहले होने के पीछे भी एक मान्यता यह है कि जब एक परेशानी को लेकर सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे तो वहां उनके दोनों पुत्र गणेश और कार्तिकेय भी मौजूद थे। भगवान शिव ने उनसे पूछा कि इनकी समस्या का हल कौन करेगा? इस सवाल पर दोनों भाई तैयार हो गए। समस्या के समाधान के लिए भोलेनाथ ने गणेश और कार्तिकेय के सामने एक प्रतियोगिता रखी और कहा कि जो भी पृथ्वी की परिक्रमा कर पहले लौटेगा वही देवताओं की मदद करेगा और उसकी पूजा ही सबसे पहले होगी।

भोलेनाथ की आज्ञा मिलते ही कार्तिकेय अपनी सवारी मोर पर बैठकर धरती की परिक्रमा करने चले गए लेकिन गणेश वहीं खड़े सोच में डुब गए। अचानक ही उन्हें एक उपाय सूझा और उन्होंने अपने माता-पिता के सात चक्कर लगाकर अपनी जगह पर खड़े हो गए। पृथ्वी का चक्कर लगाने के बाद कार्तिकेय ने वापस आने के बाद देवताओं की मदद की बात कही। भोलेनाथ ने गणेश से पूछा कि तुम पृथ्वी का परिक्रमा करने क्यों नहीं गए? गणेशजी ने फौरन जवाब देते हुए कहा कि माता-पिता के चरणों में ही सारा संसार है इस वजह से मैंने उन्हीं की परिक्रमा कर ली। गणेश के इस जवाब से भगवान शिव काफी प्रसन्न हुए और उन्हें देवताओं में प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया।

भगवान गणेश को बुद्धि का कारक भी माना जाता है और बुध को इसका स्वामी माना जाता है। इस वजह से बुधवार को गणेशजी की पूजा की परंपरा शुरू हुई है। भगवान गणेश को हाथी के सिर की वजह से गजानन भी कहा जाता है। दरअसल इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि एक बार माता पार्वती स्नान करने गईं तो उन्होंने घर के दरवाजे पर गणेश को खड़ा कर दिया और कहा कि उनके नहाने तक किसी को अंदर न आने दें। भगवान शिव के वहां पहुंचने पर गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसपर क्रोधित होकर भगवान शिव ने नंदी को गणेश से युद्ध करने को कहा, गणेश द्वारा नंदी को युद्ध में परास्त करने के बाद शिव ने गुस्से में गणेश का सिर काट दिया। माता पार्वती के वापस आने पर जब उन्हें पता चला कि गणेश उनके ही पुत्र थे तो उन्होंने हाथी का सिर जोड़कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया। इसके बाद से गणेश को गजानन के नाम से जाना जाने लगा।

आज के दौर में सामाजिक परिवेश तेजी से बदल रहा है

आज के दौर में सामाजिक परिवेश तेजी से बदल रहा है। हालत यह है कि तकनीक से दिग्भ्र्मित वर्तमान पीढ़ी को हमारे पुरातन सांस्कृतिक वैभव का कोई ज्ञान नहीं है। इसका सीधा असर एक घर और परिवार से लेकर पूरे समाज और राष्ट्र पर पड़ रहा है। वर्तमान दौर में इस पीढ़ी को तकनीक से दूर रखना भी इतना सहज नहीं है। ऐसे में मीडिया ब्रिज समूह समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए धर्म, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों पर केंद्रित डिजीटल चैनल आस्था न्यूज़ की शुरुआत की गई है। इस चैनल में हमारे सामाजिक परिवेश के साथ धर्म और संस्कृति की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। -निर्मल सिरोहिया